US Iran Ceasefire: ट्रंप की डेडलाइन से 90 मिनट पहले कैसे रुका युद्ध? जानें पूरी डिटेल

वाशिंगटन/तेहरान: अमेरिका और ईरान के बीच पिछले एक महीने से चल रहा भीषण सैन्य तनाव फिलहाल के लिए थम गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से दी गई सख्त चेतावनी की समय सीमा समाप्त होने से ठीक 90 मिनट पहले दोनों देशों ने दो सप्ताह के युद्धविराम (सीजफायर) पर सहमति व्यक्त की है। इस फैसले ने न केवल खाड़ी देशों बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था को भी एक बड़ी राहत दी है।

US Iran Ceasefire

एक महीने से चल रहे संघर्ष के बाद US Iran Ceasefire पर आधिकारिक मुहर लग गई है।

सीजफायर समझौते की मुख्य शर्तें और प्रभाव

अमेरिका और ईरान के बीच हुए इस नए समझौते का सबसे सीधा असर वैश्विक व्यापार पर पड़ेगा। कूटनीतिक वार्ताओं के बाद जो ड्राफ्ट तैयार किया गया है, उसमें दोनों पक्षों ने कुछ अहम शर्तों पर रजामंदी दी है।

होर्मुज जलडमरूमध्य से सुरक्षित व्यापार

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने पुष्टि की है कि इस दो सप्ताह के सीजफायर के दौरान ‘होर्मुज जलडमरूमध्य’ (Strait of Hormuz) के रास्ते समुद्री यातायात सुरक्षित रहेगा। ज्ञात हो कि दुनिया भर का लगभग 20 प्रतिशत कच्चा तेल और गैस इसी मार्ग से होकर गुजरता है। इस मार्ग के खुलने की खबर आते ही वैश्विक शेयर बाजारों में सकारात्मक उछाल देखा गया, क्योंकि पिछले एक महीने से व्यापारिक जगत में भारी अनिश्चितता बनी हुई थी।

यह US Iran Ceasefire समझौता अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की डेडलाइन खत्म होने से 90 मिनट पहले हुआ।

कूटनीतिक मध्यस्थता और समझौते की पृष्ठभूमि

यह समझौता रातों-रात नहीं हुआ है, बल्कि इसके पीछे कई देशों के कूटनीतिक प्रयास शामिल हैं। सोमवार को जब अमेरिका की ओर से सैन्य कार्रवाई की पूरी तैयारी कर ली गई थी, तब पर्दे के पीछे मध्यस्थों ने बातचीत का दौर तेज कर दिया था।

पाकिस्तान, मिस्र और तुर्की का कूटनीतिक योगदान

रिपोर्ट्स के अनुसार, मध्य पूर्व के लिए अमेरिकी विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और ईरानी अधिकारियों के बीच बातचीत काफी तनावपूर्ण थी। ईरान द्वारा भेजे गए शुरुआती 10-सूत्रीय प्रस्ताव को अमेरिका ने खारिज कर दिया था। इसके बाद पाकिस्तानी मध्यस्थों, मिस्र और तुर्की के विदेश मंत्रियों ने दोनों पक्षों के बीच लगातार नए प्रस्तावों का आदान-प्रदान किया। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने भी हंगरी से पाकिस्तानी अधिकारियों के साथ समन्वय स्थापित किया।

इस्लामाबाद में आगामी बैठक

इस कूटनीतिक प्रयास के अंतिम चरण में पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ ने अहम भूमिका निभाई। उन्होंने समझौते की शर्तों को सार्वजनिक रूप से साझा करते हुए दोनों देशों से इसे स्वीकार करने की अपील की। अब शुक्रवार को इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के प्रतिनिधिमंडलों के बीच एक विस्तृत बैठक होने जा रही है।

इस US Iran Ceasefire के तहत होर्मुज जलडमरूमध्य से सुरक्षित समुद्री यातायात सुनिश्चित किया जाएगा।

ट्रंप की चेतावनी और अमेरिकी सेना का 'स्टैंड डाउन

समझौते से ठीक पहले का घटनाक्रम काफी संवेदनशील था। अमेरिकी सेना और पेंटागन के अधिकारी ईरानी बुनियादी ढांचे पर संभावित कार्रवाई के लिए पूरी तरह मुस्तैद थे।

अंतिम 90 मिनट का घटनाक्रम

मंगलवार दोपहर तक यह स्पष्ट होने लगा था कि समझौते पर सहमति बन सकती है। इसके बावजूद, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपनी कड़ी बयानबाजी जारी रखी। हालांकि, पाकिस्तानी प्रधानमंत्री की अपील के बाद ट्रंप ने सोशल मीडिया पर आधिकारिक तौर पर युद्धविराम को मंजूरी दी। ट्रंप के इस पोस्ट के महज 15 मिनट बाद ही मध्य पूर्व में तैनात अमेरिकी सेना को ‘स्टैंड डाउन’ (कार्रवाई रोकने) का आदेश जारी कर दिया गया।

ईरान के सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई का निर्णय

इस पूरी प्रक्रिया में ईरान के नए सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई की भूमिका सबसे निर्णायक रही। 28 फरवरी को एयरस्ट्राइक में पूर्व सर्वोच्च नेता अली खामेनेई की मृत्यु के बाद मोजतबा ने यह पद संभाला था।

ईरान के सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई ने US Iran Ceasefire के ड्राफ्ट को अपनी अंतिम मंजूरी दी।

सुरक्षा कारणों से संदेशवाहकों का उपयोग

1979 की इस्लामी क्रांति के बाद तीसरे सर्वोच्च नेता बने मोजतबा खामेनेई सुरक्षा कारणों से सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आ रहे हैं। इज़राइल की ओर से संभावित खतरे को देखते हुए वे संदेशवाहकों के जरिए अपने अधिकारियों से संवाद कर रहे हैं।

रिवोल्यूशनरी गार्ड्स और विदेश मंत्रालय के बीच समन्वय

एक्सियोस की रिपोर्ट के मुताबिक, सोमवार और मंगलवार को हुई सघन वार्ताओं के सभी प्रमुख निर्णय मोजतबा खामेनेई के माध्यम से ही लिए गए। उनके स्पष्ट निर्देश के बाद ही विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने ईरान के एलीट फोर्स ‘रिवोल्यूशनरी गार्ड्स’ (IRGC) के कमांडरों को सीजफायर के लिए राजी किया। सूत्रों का मानना है कि मोजतबा की अंतिम मंजूरी के बिना यह कूटनीतिक सफलता संभव नहीं थी। चीन ने भी इस दौरान ईरान को कूटनीतिक समाधान खोजने की सलाह दी थी।

आगामी शुक्रवार को इस्लामाबाद में US Iran Ceasefire से जुड़ी आगे की वार्ताओं के लिए बैठक होगी।

इजराइल की चिंताएं और आगे का रास्ता

जहां एक ओर अमेरिका और ईरान ने फिलहाल शांति का रास्ता चुना है, वहीं इजराइल इस घटनाक्रम को लेकर सतर्क है। इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू इस पूरी प्रक्रिया के दौरान अमेरिकी नेतृत्व के संपर्क में रहे। इजराइल की चिंता यह है कि सीजफायर के दौरान ईरान अपनी सैन्य क्षमताओं को फिर से संगठित कर सकता है।

फिलहाल, इस दो सप्ताह के युद्धविराम ने एक बड़े क्षेत्रीय युद्ध की आशंका को टाल दिया है। अब दुनिया भर की नजरें शुक्रवार को इस्लामाबाद में होने वाली बैठक और अगले 14 दिनों की कूटनीतिक प्रगति पर टिकी होंगी।

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Scroll to Top