गुवाहाटी : असम में पिछले कई हफ्तों से चल रही चुनावी रैलियों, रोड शो और नेताओं के शोरगुल पर अब विराम लग गया है। असम विधानसभा चुनाव 2026 के लिए चुनाव प्रचार आधिकारिक तौर पर थम गया है और अब जनता की बारी है। कल, 9 अप्रैल को राज्य की सभी 126 विधानसभा सीटों पर एक साथ वोट डाले जाएंगे, जिसके लिए चुनाव आयोग ने अपनी सभी तैयारियां पूरी कर ली हैं।

असम विधानसभा चुनाव 2026: 'साइलेंट पीरियड' की शुरुआत
लोकतंत्र के सबसे बड़े पर्व में मतदान से ठीक पहले के 48 घंटों को ‘साइलेंट पीरियड’ या मौन अवधि कहा जाता है। जन प्रतिनिधित्व अधिनियम (Representation of the People Act) के तहत, इस अवधि के दौरान कोई भी राजनीतिक दल या उम्मीदवार किसी भी प्रकार की जनसभा, रैली या लाउडस्पीकर के माध्यम से चुनाव प्रचार नहीं कर सकता है।
इस नियम का मुख्य उद्देश्य मतदाताओं को बिना किसी बाहरी दबाव या शोरगुल के, शांतिपूर्वक यह सोचने का समय देना है कि वे किसे अपना प्रतिनिधि चुनना चाहते हैं। असम विधानसभा चुनाव 2026 में भी यह नियम कड़ाई से लागू कर दिया गया है। अब प्रत्याशी केवल घर-घर जाकर (Door-to-door) जनसंपर्क कर सकते हैं।
असम विधानसभा चुनाव 2026 के लिए 48 घंटे का ‘साइलेंट पीरियड’ (मौन अवधि) शुरू हो गया है।
126 सीटों पर एक ही चरण में होगा मतदान
इस बार चुनाव आयोग ने असम की भौगोलिक और प्रशासनिक स्थिति को ध्यान में रखते हुए पूरे राज्य में एक ही चरण में मतदान कराने का फैसला किया है। 9 अप्रैल की सुबह से लेकर शाम तक सभी 126 विधानसभा क्षेत्रों के मतदाता ईवीएम (EVM) में अपना फैसला कैद कर देंगे। एक ही चरण में मतदान होने से राज्य प्रशासन और सुरक्षा बलों पर बड़ी जिम्मेदारी आ गई है।
राज्य की सभी 126 विधानसभा सीटों पर 9 अप्रैल को एक ही चरण में मतदान होगा।
2.4 करोड़ मतदाता तय करेंगे असम का भविष्य
किसी भी राज्य का भविष्य उसके मतदाताओं के हाथ में होता है। राज्य चुनाव आयोग के आंकड़ों के अनुसार, इस बार लगभग 2.4 करोड़ (24 मिलियन) मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करने के योग्य हैं।
महिला और युवा मतदाताओं की अहम भूमिका
इन 2.4 करोड़ मतदाताओं में पुरुष और महिला वोटरों की संख्या लगभग बराबर है, जो यह दर्शाता है कि राज्य की सत्ता तय करने में आधी आबादी (महिलाओं) की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होगी। इसके अलावा, इस चुनाव में लाखों ‘फर्स्ट टाइम वोटर्स’ (पहली बार वोट देने वाले युवा) भी शामिल हो रहे हैं। शिक्षा, रोजगार और विकास जैसे मुद्दे इन युवा मतदाताओं की पहली प्राथमिकता माने जा रहे हैं।
चुनाव आयोग की सख्त तैयारियां और सुरक्षा व्यवस्था
शांतिपूर्ण, पारदर्शी और निष्पक्ष मतदान सुनिश्चित करने के लिए भारत निर्वाचन आयोग (ECI) ने असम में सुरक्षा व्यवस्था चाक-चौबंद कर दी है।
- पोलिंग बूथ और ईवीएम: राज्य भर में हजारों की संख्या में मतदान केंद्र (Polling Booths) बनाए गए हैं। सभी संवेदनशील और अति-संवेदनशील बूथों की पहचान कर ली गई है। मतदान कर्मियों को ईवीएम और वीवीपैट (VVPAT) मशीनों के साथ उनके संबंधित मतदान केंद्रों पर सुरक्षित पहुंचा दिया गया है।
- सुरक्षा बलों की तैनाती: असम पुलिस के साथ-साथ केंद्रीय अर्धसैनिक बलों (CAPF) की भारी टुकड़ियां राज्य के हर कोने में तैनात की गई हैं। अंतर्राज्यीय और अंतरराष्ट्रीय सीमाओं पर चौकसी बढ़ा दी गई है ताकि किसी भी प्रकार की अवैध गतिविधि या घुसपैठ को रोका जा सके।
इस असम विधानसभा चुनाव 2026 में लगभग 2.4 करोड़ मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे।
प्रमुख राजनीतिक दल और उनके मुख्य चुनावी मुद्दे
प्रचार के अंतिम दिनों में भारतीय जनता पार्टी (BJP) और कांग्रेस (Congress) सहित सभी प्रमुख दलों ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी थी। जैसा कि हमने पिछले दिनों बारपेटा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रैली में देखा, सत्ता पक्ष का मुख्य फोकस असम की समृद्धि, सुरक्षा, महिला सशक्तिकरण और शांति समझौतों पर रहा। वहीं, विपक्ष (कांग्रेस और अन्य सहयोगी दल) ने महंगाई, बेरोजगारी और स्थानीय अस्मिता के मुद्दों को जोर-शोर से उठाया है।
असम चुनाव 2026 से जुड़े कुछ अहम और तार्किक सवाल
कल होने वाले मतदान से पहले राजनीतिक विश्लेषकों के सामने कई महत्वपूर्ण सवाल हैं:
क्या असम की जनता विकास और राष्ट्रीय सुरक्षा के नाम पर मौजूदा सरकार को दोबारा जनादेश देगी?
- क्या विपक्ष द्वारा उठाए गए स्थानीय मुद्दे और एंटी-इन्कंबेंसी (सत्ता विरोधी लहर) का असर मतदान प्रतिशत पर पड़ेगा?
- एक ही चरण में 126 सीटों पर मतदान होने से किस राजनीतिक दल के ‘बूथ मैनेजमेंट’ को सबसे ज्यादा फायदा मिलेगा?
- महिला मतदाताओं के लिए की गई घोषणाएं (जैसे आरक्षण और कल्याणकारी योजनाएं) वोटिंग पैटर्न को कितना बदल पाएंगी?
शांतिपूर्ण मतदान के लिए चुनाव आयोग (ECI) ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं।
निष्कर्ष
निष्कर्ष के तौर पर यह कहा जा सकता है कि असम विधानसभा चुनाव 2026 राज्य के राजनीतिक इतिहास में एक अहम पड़ाव है। चुनाव प्रचार के दौरान पक्ष और विपक्ष दोनों ने अपने-अपने तर्क और तथ्य जनता के सामने रख दिए हैं। अब गेंद पूरी तरह से असम के 2.4 करोड़ मतदाताओं के पाले में है। 9 अप्रैल को होने वाला मतदान केवल एक नई सरकार का चुनाव नहीं करेगा, बल्कि यह आने वाले वर्षों में राज्य की विकास यात्रा और उसकी राजनीतिक दिशा को भी तय करेगा। चुनाव आयोग की मुस्तैदी और मतदाताओं के उत्साह को देखते हुए एक भारी मतदान की उम्मीद की जा रही है।


