गुवाहाटी : असम की 126 विधानसभा सीटों पर 9 अप्रैल को संपन्न हुए भारी और शांतिपूर्ण मतदान के बाद, अब पूरे देश की नज़रें इस बात पर टिकी हैं कि राज्य में अगली सरकार किसकी बनेगी। चुनाव आयोग द्वारा मतदान की समाप्ति की औपचारिक घोषणा के बाद, शनिवार को विभिन्न न्यूज़ चैनलों और सर्वेक्षण एजेंसियों ने अपने-अपने अनुमान जारी कर दिए हैं। हालिया असम चुनाव एग्जिट पोल के जो आंकड़े सामने आए हैं, वे राज्य में एक बेहद दिलचस्प और कांटे की राजनीतिक लड़ाई की ओर इशारा कर रहे हैं।

पोल ऑफ पोल्स: क्या कहते हैं एग्जिट पोल के शुरुआती रुझान?
जब कई अलग-अलग सर्वे एजेंसियों के आंकड़ों को मिलाकर एक औसत निकाला जाता है, तो उसे Poll of Polls कहा जाता है। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, इस बार का चुनाव पिछले कई चुनावों के मुकाबले काफी अलग रहा है।
एजेंसियों द्वारा जारी किए गए इन शुरुआती रुझानों में भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाले गठबंधन और कांग्रेस के नेतृत्व वाले विपक्षी गठबंधन के बीच कड़ी टक्कर देखने को मिल रही है। हालांकि अधिकांश असम चुनाव एग्जिट पोल सत्ताधारी गठबंधन को बहुमत के जादुई आंकड़े (64 सीट) के बेहद करीब या उससे थोड़ा आगे दिखा रहे हैं, लेकिन विपक्षी गठबंधन की सीटों में भी पिछले चुनाव की तुलना में अच्छी खासी वृद्धि का अनुमान लगाया गया है।
9 अप्रैल को हुए मतदान के बाद आज असम चुनाव एग्जिट पोल के आंकड़े जारी कर दिए गए हैं।
विभिन्न सर्वे एजेंसियों के असम चुनाव एग्जिट पोल में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच कांटे की टक्कर दिखाई दे रही है।
अलग-अलग क्षेत्रों (Regions) का चुनावी मिजाज
असम की राजनीति को भौगोलिक रूप से तीन मुख्य हिस्सों में समझा जा सकता है— ऊपरी असम (Upper Assam), निचला असम (Lower Assam) और बराक घाटी (Barak Valley)।
सर्वेक्षणों के अनुसार, ऊपरी असम के चाय बागान वाले इलाकों में सत्ताधारी दल का प्रभाव अभी भी मजबूत दिख रहा है। वहीं, निचले असम और बराक घाटी के कुछ हिस्सों में विपक्षी गठबंधन ने स्थानीय मुद्दों और अल्पसंख्यक मतों के ध्रुवीकरण के सहारे कड़ी चुनौती पेश की है। क्षेत्रीय दलों के प्रदर्शन पर भी सबकी नजरें टिकी हैं, क्योंकि कुछ सीटों पर वे ‘किंगमेकर’ की भूमिका निभा सकते हैं।
किन अहम मुद्दों ने मतदाताओं को सबसे ज्यादा प्रभावित किया?
एग्जिट पोल केवल सीटों का अनुमान नहीं बताते, बल्कि यह भी स्पष्ट करते हैं कि जनता ने किस आधार पर वोट दिया है। इस बार के मतदान में विकास और स्थानीय अस्मिता का मुद्दा सबसे ऊपर रहा।
महिला और युवा मतदाताओं की भूमिका
एग्जिट पोल के आंकड़ों से उठने वाले कुछ अहम सवाल
- क्या विपक्षी गठबंधन को स्थानीय मुद्दों (एंटी-इन्कंबेंसी) का उतना फायदा मिला है, जितना वे दावा कर रहे थे?
- क्या एग्जिट पोल के अनुमान 100% सटीक साबित होंगे, या असली नतीजों के दिन कोई बड़ा राजनीतिक ‘उलटफेर’ देखने को मिलेगा?
- निर्दलीय और छोटे क्षेत्रीय दल अगर 5-7 सीटें जीत जाते हैं, तो त्रिशंकु विधानसभा (Hung Assembly) की स्थिति में उनका रुख क्या होगा?
नेताओं के दावे और जमीनी हकीकत
इन सर्वे रिपोर्टों के आने के बाद राजनीतिक दलों की प्रतिक्रियाएं भी आनी शुरू हो गई हैं। राज्य के मुख्यमंत्री और सत्ताधारी दल के नेताओं ने इन रुझानों का स्वागत करते हुए दावा किया है कि असली नतीजों में उनकी सीटें एग्जिट पोल के अनुमानों से भी कहीं ज्यादा होंगी।
दूसरी तरफ, विपक्षी नेताओं ने इन एग्जिट पोल्स को सिरे से खारिज कर दिया है। विपक्ष का तर्क है कि सर्वेक्षण एजेंसियां ग्रामीण इलाकों की असली नब्ज को पकड़ने में अक्सर नाकाम रहती हैं। उनका मानना है कि जनता ने बदलाव के लिए शांतिपूर्ण तरीके से ‘बंपर वोटिंग’ की है, जो असली नतीजों के दिन स्पष्ट हो जाएगी।
निष्कर्ष
निष्कर्ष के तौर पर, आज जारी हुए असम चुनाव एग्जिट पोल के आंकड़ों ने राज्य की राजनीतिक सरगर्मियों को अपने चरम पर पहुंचा दिया है। हालांकि, यह याद रखना महत्वपूर्ण है कि एग्जिट पोल केवल एक वैज्ञानिक अनुमान होते हैं, ये अंतिम परिणाम नहीं हैं। भारत के चुनावी इतिहास में कई बार एग्जिट पोल के अनुमान जमीनी नतीजों से बिल्कुल अलग साबित हुए हैं। असम की जनता ने ईवीएम में अपना क्या फैसला कैद किया है, यह तो मतगणना के दिन ही पूरी तरह से साफ हो पाएगा। तब तक दावों और प्रतिदावों का दौर जारी रहेगा।


