बारपेटा: असम में 9 अप्रैल को होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक सरगर्मियां अपने चरम पर हैं। सोमवार को पीएम मोदी असम रैली के दौरान एक बार फिर विपक्ष पर जमकर बरसे। दिन की अपनी तीन जनसभाओं में से पहली सभा को बारपेटा में संबोधित करते हुए, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्पष्ट किया कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) का मुख्य फोकस असम की समृद्धि, आत्मनिर्भरता और उसे वैश्विक पहचान दिलाने पर है। इसके साथ ही उन्होंने राष्ट्रीय सुरक्षा, किसानों के मुद्दे और घुसपैठियों के विषय पर कांग्रेस को आड़े हाथों लिया। पीएम मोदी असम रैली

असम में शांति और विकास के 10 साल का लेखा-जोखा
रैली को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि पिछले 10 वर्षों में भाजपा के शासन ने असम को मुश्किलों और असुरक्षा के माहौल से बाहर निकाला है। राज्य में शांति और सद्भाव स्थापित किया गया है और असम की मूल पहचान को सुरक्षित रखा गया है। उन्होंने जनता को भरोसा दिलाया कि आने वाले वर्ष राज्य में और अधिक समृद्धि व आत्मनिर्भरता लेकर आएंगे।
महिला आरक्षण बिल पर समर्थन की अपील
पीएम मोदी असम रैली के मंच से एक और बड़ा मुद्दा उठाया गया, जो महिला सशक्तिकरण से जुड़ा है। इसी महीने बुलाए गए संसद के विशेष सत्र में 33% महिला आरक्षण (लोकसभा और विधानसभाओं में) को तेजी से लागू करने के लिए एक संशोधन बिल लाया जाना है। पीएम मोदी ने सभी राजनीतिक दलों से इस बिल का समर्थन करने का आग्रह किया। उन्होंने असम की महिलाओं से अपील की कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और नेताओं पर इस बिल को सर्वसम्मति से पारित करने का दबाव बनाएं।
किसानों और आदिवासियों के मुद्दे पर तथ्यों के साथ कांग्रेस पर प्रहार
प्रधानमंत्री ने अपने भाषण में तथ्यों और आंकड़ों का हवाला देते हुए कांग्रेस की पूर्व सरकारों पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के समय में किसानों का हक बिचौलियों के पास जाता था, जबकि भाजपा सरकार सीधे किसानों के बैंक खातों में पैसा भेज रही है।
रैली में पेश किए गए कृषि और आदिवासी विकास के मुख्य तथ्य:
- पीएम किसान सम्मान निधि: इसके तहत असम के किसानों को अब तक ₹7,500 करोड़ से अधिक की राशि मिल चुकी है।
- यूरिया की कीमत: जब दुनिया भर में यूरिया के दाम ₹3,000 प्रति बोरी तक पहुँच गए थे, तब भारत सरकार ने किसानों को भारी सब्सिडी देते हुए इसे मात्र ₹300 में उपलब्ध कराया।
- धान की एमएसपी (MSP): कांग्रेस राज में जो एमएसपी ₹1,300 प्रति क्विंटल थी, उसे भाजपा सरकार ने बढ़ाकर ₹2,370 कर दिया है।
- कुल एमएसपी भुगतान: 2004 से 2014 (कांग्रेस काल) के बीच देश भर के किसानों को ₹4 लाख करोड़ की एमएसपी मिली थी, जबकि 2014 से 2024 के बीच यह आंकड़ा बढ़कर ₹16 लाख करोड़ हो गया।
- आदिवासी क्षेत्रों में शांति: कांग्रेस के समय पूर्वोत्तर में हिंसा के कारण हर साल लगभग 1,000 लोग मारे जाते थे। भाजपा के पिछले 10-12 वर्षों के शांति समझौतों के कारण करीब 10,000 विद्रोहियों ने हथियार डाल दिए हैं।
ऑपरेशन सिंदूर' और राष्ट्रीय सुरक्षा पर कांग्रेस की घेराबंदी
राष्ट्रीय सुरक्षा का मुद्दा उठाते हुए प्रधानमंत्री ने कांग्रेस पर बड़ा आरोप लगाया। 2025 के पहलगाम हमले के जवाब में भारतीय रक्षा बलों द्वारा किए गए ‘ऑपरेशन सिंदूर’ (Operation Sindoor) का जिक्र करते हुए मोदी ने कहा कि हमारी सेना ने महज कुछ ही घंटों में पाकिस्तान को घुटनों पर ला दिया था। लेकिन उन्होंने आरोप लगाया कि ऐसे संवेदनशील समय में कांग्रेस “दुश्मन का एजेंडा” चला रही थी। साथ ही, ‘वन रैंक, वन पेंशन’ (OROP) के मुद्दे पर भी कांग्रेस पर सेना को गुमराह करने का आरोप लगाया गया।
घुसपैठिए बनाम मूल निवासी: असम की पहचान का सवाल
असम चुनाव में अवैध घुसपैठ हमेशा से एक बड़ा मुद्दा रहा है। प्रधानमंत्री ने कांग्रेस पर अवैध प्रवासियों को असम में प्रवेश करने और बसाने के लिए प्रोत्साहित करने का आरोप लगाया। इसके विपरीत, उन्होंने बताया कि भाजपा सरकार ऐसे “अतिक्रमणकारियों” को बेदखल कर रही है और मूल निवासियों व चाय-जनजाति (tea-tribe) समुदाय को भूमि अधिकार दे रही है। पीएम मोदी ने दावा किया कि कांग्रेस एक ऐसा कानून लाना चाहती है जिसमें किसी को ‘घुसपैठिया’ कहने पर भी जेल हो सकती है।
इस चुनावी बयानबाजी से उठने वाले कुछ तार्किक सवाल:
- क्या घुसपैठियों और मूल निवासियों के भूमि अधिकारों का यह मुद्दा 9 अप्रैल के चुनाव में निर्णायक भूमिका निभाएगा?
- ‘ऑपरेशन सिंदूर’ और राष्ट्रीय सुरक्षा को लेकर प्रधानमंत्री द्वारा उठाए गए सवालों का कांग्रेस किस तर्कों के साथ बचाव करेगी?
- क्या कृषि क्षेत्र में पेश किए गए एमएसपी के भारी-भरकम आंकड़े असम के ग्रामीण मतदाताओं के बीच भाजपा के पक्ष में माहौल बना पाएंगे?
निष्कर्ष
निष्कर्ष के तौर पर देखा जाए तो पीएम मोदी असम रैली ने 9 अप्रैल को होने वाले मतदान के लिए भाजपा के मुख्य एजेंडे को पूरी तरह स्पष्ट कर दिया है। यह भाषण केवल राजनीतिक बयानबाजी नहीं था, बल्कि इसमें एमएसपी वृद्धि, यूरिया पर सब्सिडी, और शांति समझौतों जैसे आंकड़ों का तार्किक इस्तेमाल किया गया। विकास, महिला आरक्षण, किसानों की आय और असम की सुरक्षा जैसे मुद्दों को उठाकर भाजपा ने कांग्रेस को रक्षात्मक स्थिति में धकेलने का प्रयास किया है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि असम की जनता इन तर्कों और तथ्यों पर 9 अप्रैल को किस पार्टी के पक्ष में अपना जनादेश देती है। देश और दुनिया के हर सटीक चुनावी अपडेट के लिए kajaltripathi.in के साथ जुड़े रहें।