पटना: बिहार की सियासत और सस्पेंस का रिश्ता बहुत पुराना है। राज्य में एक बार फिर सियासी बिसात बिछ चुकी है और इस बार मुकाबला है Bihar Rajya Sabha Election का। बिहार से राज्यसभा की पांच सीटें खाली हो रही हैं। चुनावी अंकगणित के हिसाब से एनडीए (NDA) के पास 4 सीटें जीतने का मजबूत नंबर गेम है, और उनकी जीत लगभग पक्की मानी जा रही है।

लेकिन, असली ‘खेला’ तो पांचवीं सीट को लेकर हो रहा है। इस इकलौती सीट के लिए विपक्षी खेमे यानी RJD ने एक ऐसी चाल चली है, जिसने न सिर्फ बिहार बल्कि दिल्ली तक की राजनीति में हलचल मचा दी है। सबसे ज्यादा टेंशन में अगर कोई है, तो वो हैं AIMIM के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी। आइए काजल त्रिपाठी के साथ बिहार के इस पूरे सियासी ड्रामे को ‘डिकोड’ करते हैं।
5वीं सीट के लिए RJD का मुस्लिम कार्ड
राजनीति में टाइमिंग का बहुत महत्व होता है। पांचवीं सीट को जीतने के लिए आरजेडी के भीतर एक ऐसे नाम की चर्चा जोरों पर है, जो सामाजिक और भावनात्मक—दोनों पैमानों पर फिट बैठता है। यह नाम है दिवंगत बाहुबली नेता और पूर्व सांसद मोहम्मद शहाबुद्दीन की पत्नी हिना शहाब (Hena Shahab) का।
आरजेडी के कद्दावर नेता और विधायक भाई वीरेंद्र ने पटना में पत्रकारों से बातचीत में इस बात के साफ संकेत दिए हैं। उन्होंने बेबाकी से कहा, “हमारी व्यक्तिगत राय है कि किसी अकलियत (अल्पसंख्यक) को यह सीट दी जाए। खासकर अगर हिना शहाब को उम्मीदवार बनाया जाता है, तो हम यह सीट आसानी से निकाल लेंगे।
कौन हैं हिना शहाब?
जो लोग बिहार की राजनीति को करीब से नहीं जानते, उन्हें बता दें कि हिना शहाब सीवान के कद्दावर और विवादित नेता रहे दिवंगत शहाबुद्दीन की पत्नी हैं।
- उन्होंने 2009 में RJD के टिकट पर लोकसभा चुनाव लड़ा था।
- 2024 के लोकसभा चुनाव में वह निर्दलीय मैदान में उतरी थीं, लेकिन जीत नहीं मिल सकी।
- हालांकि, राजनीति में उनके परिवार का रसूख कायम है। हाल ही में 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव में उनके बेटे ओसामा शहाब ने RJD के टिकट पर शानदार जीत दर्ज की है।
यही वजह है कि आरजेडी अब हिना शहाब को राज्यसभा भेजकर मुसलमानों के बीच एक मजबूत संदेश देना चाहती है।
ओवैसी की AIMIM के लिए धर्मसंकट
अब आप सोचेंगे कि आरजेडी के इस फैसले से असदुद्दीन ओवैसी को क्या परेशानी है? दरअसल, यही तो आरजेडी का असली मास्टरस्ट्रोक है!
AIMIM पहले ही ऐलान कर चुकी है कि वह राज्यसभा की इस 5वीं सीट पर अपना खुद का उम्मीदवार उतारेगी। AIMIM के बिहार प्रदेश अध्यक्ष अख्तरुल ईमान ने साफ कहा है कि उनकी पार्टी मैदान में है और सांप्रदायिक ताकतों को रोकने के लिए विपक्ष को उनका साथ देना चाहिए।
लेकिन यहाँ फंस गया है सबसे बड़ा पेंच:
अगर आरजेडी हिना शहाब को अपना उम्मीदवार घोषित कर देती है, तो AIMIM के लिए उनका विरोध करना लोहे के चने चबाने जैसा होगा। हिना शहाब एक बड़ा और सम्मानित मुस्लिम चेहरा हैं। अगर ओवैसी की पार्टी उनके खिलाफ अपना उम्मीदवार उतारती है, तो उन पर ‘मुस्लिम वोटों को बांटने’ और ‘अल्पसंख्यक चेहरे को हराने’ का आरोप लगेगा। आरजेडी ने ओवैसी के सामने ऐसी बिसात बिछाई है कि उन्हें या तो अपनी दावेदारी छोड़नी पड़ेगी या फिर हिना शहाब को समर्थन देना पड़ेगा।
क्या है आगे का रास्ता?
बिहार के राजनीतिक जानकारों का मानना है कि राज्यसभा चुनाव सिर्फ विधायकों की संख्या का गणित नहीं है, बल्कि यह ‘संदेश (Perception) की राजनीति’ है।
अगर विपक्ष एकजुट नहीं हुआ और AIMIM ने अपना उम्मीदवार अलग से उतारा, तो वोटों का बंटवारा होगा और यह 5वीं सीट भी आसानी से NDA के खाते में चली जाएगी। ओवैसी की पार्टी बिहार में अपनी जड़ें मजबूत करना चाहती है, लेकिन इस वक्त उन्हें यह तय करना होगा कि वह विपक्षी एकता का हिस्सा बनेंगे या फिर ‘एकला चलो’ की नीति अपनाकर त्रिकोणीय मुकाबला बनाएंगे।
❓ जनता की अदालत: आपका क्या सोचना है?
- क्या हिना शहाब को उम्मीदवार बनाने से RJD यह 5वीं राज्यसभा सीट आसानी से जीत पाएगी?
- क्या असदुद्दीन ओवैसी को अपनी पार्टी का उम्मीदवार उतारने के बजाय हिना शहाब का समर्थन करना चाहिए?
- बिहार में मुसलमानों का असली नेता कौन है—तेजस्वी यादव या असदुद्दीन ओवैसी?
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(Source of News):
यह विश्लेषणात्मक रिपोर्ट आरजेडी नेता भाई वीरेंद्र के हालिया मीडिया बयानों, AIMIM प्रदेश अध्यक्ष अख्तरुल ईमान की प्रेस कॉन्फ्रेंस और बिहार के स्थानीय राजनीतिक घटनाक्रमों (Local Media Reports) पर आधारित है।