नई दिल्ली(Bharat Mandapam Protest): तकनीक, भविष्य और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस। दिल्ली के ‘भारत मंडपम’ में 16 से 20 फरवरी 2026 तक चले ‘India AI Impact Summit‘ का मकसद दुनिया को यह दिखाना था कि भारत अब ग्लोबल टेक लीडर बनने के लिए पूरी तरह तैयार है। पांच दिनों तक चले इस वैश्विक महाकुंभ में दुनिया भर के दिग्गज जुटे। लेकिन शुक्रवार को, यानी इस आयोजन के आखिरी दिन, कुछ ऐसा हुआ जिसने तकनीक की चर्चाओं को पीछे छोड़कर एक बड़े राजनीतिक भूचाल को जन्म दे दिया।

शिखर सम्मेलन के अंतिम क्षणों में राजनीति ने इस कदर एंट्री मारी कि वहां मौजूद विदेशी मेहमान और आगंतुक भी हक्के-बक्के रह गए। आइए इस पूरे विवाद को समझते हैं कि आखिर बंद दरवाजों के पीछे से ये कैसी सियासत सड़क और फिर अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुँच गई।
हॉल नंबर-5 का वो हाई-वोल्टेज ड्रामा: क्या हुआ था?
https://en.wikipedia.org/wiki/Narendra_Modiशुक्रवार को जब AI समिट अपने अंतिम चरण की ओर बढ़ रहा था, तभी हॉल नंबर-5 में अचानक अफरा-तफरी का माहौल बन गया। इंडियन यूथ कांग्रेस के कुछ कार्यकर्ता अचानक वहां पहुंच गए। विरोध जताने का उनका तरीका ऐसा था जिसकी किसी ने कल्पना नहीं की थी।
इन कार्यकर्ताओं ने अमेरिका के साथ होने वाले व्यापार समझौते (US Trade Deal) का विरोध करते हुए अपनी टी-शर्ट्स उतार दीं और ‘टॉपलेस’ (शर्टलेस) होकर प्रदर्शन शुरू कर दिया।
बात सिर्फ कपड़े उतारने तक सीमित नहीं थी। इस प्रदर्शन का ‘प्रॉप’ (Prop) वह टी-शर्ट्स थीं जो इन कार्यकर्ताओं के हाथों में लहरा रही थीं।
टी-शर्ट पर क्या था? उन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की तस्वीरें छपी हुई थीं।
नारे क्या थे? उन पर अंग्रेजी के बड़े अक्षरों में ‘India US Trade Deal’, ‘Epstein Files’ और ‘PM is Compromised’ जैसे बेहद गंभीर, सीधे और विवादित नारे लिखे हुए थे।
“यहाँ बता दें कि ‘एपस्टीन फाइल्स’ का विवाद इस समिट में पहले दिन से ही साये की तरह मंडरा रहा है, जब इसी विवाद के चलते बिल गेट्स ने अपना मुख्य भाषण रद्द कर दिया था। प्रदर्शनकारियों ने उसी नब्ज को पकड़ने की कोशिश की।”
विदेशी मेहमान हैरान, दिल्ली पुलिस का एक्शन
चूंकि यह एक अंतरराष्ट्रीय स्तर का मंच था, इस अचानक हुए हंगामे से हॉल में मौजूद विदेशी डेलीगेट्स (Delegates) और टेक कंपनियों के प्रतिनिधि हैरान रह गए। कार्यक्रम में मौजूद कुछ लोगों और प्रदर्शनकारियों के बीच तीखी नोकझोंक भी हुई।
स्थिति बेकाबू होती, उससे पहले ही मौके पर मौजूद दिल्ली पुलिस और सुरक्षाबलों ने तुरंत मोर्चा संभाल लिया। कुछ ही मिनटों के भीतर पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को हॉल से बाहर खदेड़ा और करीब 10 लोगों को हिरासत में ले लिया। लेकिन तब तक जो नुकसान होना था, वह हो चुका था—कैमरों में तस्वीरें कैद हो चुकी थीं और खबर आग की तरह फैल गई।
बीजेपी का तीखा पलटवार: "यह राष्ट्रीय शर्म है"
इस ‘शर्टलेस प्रदर्शन’ ने देश की सियासत का पारा सातवें आसमान पर पहुंचा दिया है। सत्ताधारी पार्टी बीजेपी ने इसे सीधे तौर पर ‘भारत की वैश्विक छवि को धूमिल करने की साजिश’ करार दिया है।
बीजेपी के आईटी सेल के प्रमुख अमित मालवीय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (X) पर तीखा हमला बोलते हुए लिखा:
“यह एक राष्ट्रीय शर्म है। ऐसे समय में जब भारत तकनीक के क्षेत्र में खुद को विश्व पटल पर मजबूती से स्थापित कर रहा है, तब कांग्रेस ने गरिमा की जगह व्यवधान और तमाशे का रास्ता चुना है।” मालवीय ने सीधा आरोप लगाया कि राहुल गांधी के नेतृत्व में यह सब जानबूझकर किया गया है ताकि भारत को वैश्विक मंच पर शर्मिंदा किया जा सके। वहीं, बीजेपी प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने तो कांग्रेस कार्यकर्ताओं की तुलना ‘शहरी नक्सलियों’ (Urban Naxals) से कर दी और मांग की कि कांग्रेस को देश से सार्वजनिक माफी मांगनी चाहिए।
लोकतंत्र vs कूटनीतिक मर्यादा (Bharat Mandapam Protest)
इस पूरी घटना को अगर हम तर्क की कसौटी पर कसें, तो इसके दो स्पष्ट पहलू नजर आते हैं:
- विपक्ष का तर्क (लोकतांत्रिक अधिकार): किसी भी व्यापार समझौते (Trade Deal) पर अगर विपक्ष को शंका है, तो उस पर सवाल उठाना और विरोध जताना उनका संवैधानिक अधिकार है। लोकतंत्र में असहमति की आवाज़ को दबाया नहीं जा सकता।
- सत्ता पक्ष का तर्क (अंतरराष्ट्रीय मंच की गरिमा): विरोध का स्थान संसद या जंतर-मंतर हो सकता है। लेकिन जब देश विदेशी मेहमानों की मेजबानी कर रहा हो, तब घरेलू राजनीति की भड़ास किसी अंतरराष्ट्रीय मंच पर निकालना क्या सही है? क्या विदेशी डेलीगेट्स के सामने ऐसे प्रदर्शन से भारत की छवि एक ‘अस्थिर बाज़ार’ की नहीं बनेगी?
निष्कर्ष
भारत मंडपम का ‘India AI Impact Summit’ भले ही अब खत्म हो गया हो, लेकिन इस टॉपलेस प्रदर्शन ने जो सियासी चिंगारी भड़काई है, वह फिलहाल ठंडी होती नहीं दिख रही है। आने वाले दिनों में संसद से लेकर सड़क तक ‘US Trade Deal‘ और ‘एपस्टीन फाइल्स‘ की गूंज सुनाई देने वाली है।
आपकी राय क्या है? (Bharat Mandapam Protest) को लेकर :
क्या अंतरराष्ट्रीय मंचों पर ऐसे राजनीतिक प्रदर्शन सही हैं या विरोध के लिए घरेलू मंचों का ही इस्तेमाल होना चाहिए? क्या आपको लगता है कि इस ट्रेड डील में वाकई कुछ ऐसा है जिसे छिपाया जा रहा है? नीचे कमेंट बॉक्स में अपनी बेबाक राय जरूर लिखें!