(महाराष्ट्र/Rahul Gandhi Bhiwandi Court): भारतीय राजनीति में बयानों के तीर अक्सर अदालत की चौखट तक पहुँच जाते हैं। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी के साथ भी कुछ ऐसा ही हो रहा है। आज, यानी 21 फरवरी 2026 को, राहुल गांधी को एक बार फिर महाराष्ट्र की भिवंडी अदालत (Bhiwandi Court) के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं।
सुनने में यह एक आम पेशी लग सकती है, लेकिन आज की सुनवाई में एक बेहद अहम और नया कानूनी पेंच आ गया है। इस पेंच ने न सिर्फ इस केस की तारीखों को आगे बढ़ाया है, बल्कि देशभर की मीडिया का ध्यान भी अपनी ओर खींच लिया है। आइए, इस पूरे हाई-प्रोफाइल मामले को समझते हैं कि आखिर बंद दरवाजों के पीछे क्या चल रहा है।

भिवंडी कोर्ट में आज का कानूनी पेंच: क्या है पूरा मामला?
किसी भी आपराधिक या मानहानि के मामले में जब किसी नेता को जमानत मिलती है, तो अदालत एक ‘जमानतदार’ (Surety) की मांग करती है, जो यह गारंटी लेता है कि आरोपी तय तारीखों पर कोर्ट में पेश होगा।
राहुल गांधी के वकील नारायण अय्यर के मुताबिक, आज कोर्ट में उन्हें एक नया ‘जमानतदार’ पेश करना होगा। अब आप सोचेंगे कि जब जमानत पहले ही मिल चुकी है, तो अचानक नए जमानतदार की जरूरत क्यों पड़ गई?
दरअसल, जब राहुल गांधी को इस मामले में जमानत दी गई थी, तब पूर्व केंद्रीय मंत्री और कांग्रेस के कद्दावर नेता शिवराज पाटिल चाकूरकर उनके जमानतदार बने थे। लेकिन दुर्भाग्यवश, बीते 12 दिसंबर 2025 को उनका निधन हो गया। कानूनी प्रक्रिया के तहत, अगर जमानतदार का निधन हो जाता है, तो आरोपी को अदालत के सामने एक नया जमानतदार पेश करना अनिवार्य होता है। इसी कागजी और कानूनी औपचारिकता को पूरा करने के लिए आज की पेशी बेहद अहम मानी जा रही है।
फ्लैशबैक 2014: वो बयान जिसने खड़ा किया बवंडर
जो दर्शक या पाठक इस मामले की गहराई को नहीं जानते, उन्हें थोड़ा पीछे यानी साल 2014 के लोकसभा चुनावों में चलना होगा। यह पूरा विवाद आज का नहीं है, बल्कि एक दशक से भी ज्यादा पुराना है।
क्या कहा था राहुल गांधी ने? (Rahul Gandhi Bhiwandi Court)
2014 के चुनाव प्रचार के दौरान, भिवंडी के सोनाले गांव में कांग्रेस की एक बड़ी रैली चल रही थी। आरोप है कि इसी जनसभा को संबोधित करते हुए राहुल गांधी ने अपने भाषण में कह दिया था कि “महात्मा गांधी की हत्या के पीछे आरएसएस (RSS) के लोगों का हाथ था।
यह कोई छोटा आरोप नहीं था। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के लिए यह सीधा उनकी विचारधारा और इतिहास पर हमला था। इस बयान के तुरंत बाद भिवंडी के ही रहने वाले आरएसएस के एक स्थानीय कार्यकर्ता राजेश कुंते ने अदालत का दरवाज़ा खटखटाया। कुंते ने अपनी शिकायत में तर्क दिया कि राहुल गांधी की इस मनगढ़ंत और झूठी टिप्पणी से आरएसएस की छवि को भारी नुकसान पहुँचा है। उन्होंने राहुल गांधी के खिलाफ आईपीसी (IPC) की धारा 500 यानी आपराधिक मानहानि (Criminal Defamation) के तहत मुकदमा दर्ज करा दिया।
मानहानि के मुकदमों की राजनीति
अगर हम इस पूरे मामले का निष्पक्ष होकर विश्लेषण करें, तो यह सिर्फ एक कानूनी लड़ाई नहीं है, बल्कि भारत की दो सबसे बड़ी विचारधाराओं (Congress vs RSS) का राजनीतिक अखाड़ा है।
भारतीय राजनीति में मानहानि के केस अक्सर नेताओं को घेरने के लिए एक ‘हथियार’ की तरह इस्तेमाल किए जाते हैं। इससे पहले भी ‘मोदी सरनेम’ वाले मानहानि केस में राहुल गांधी की सांसदी जा चुकी है (जो बाद में सुप्रीम कोर्ट से बहाल हुई)। सत्ता पक्ष हो या विपक्ष, दोनों ही बयानों पर कानूनी शिकंजा कसने का कोई मौका नहीं छोड़ते। आलोचकों का मानना है कि ऐसे मामले अदालतों का कीमती समय बर्बाद करते हैं, लेकिन राजनीतिक दलों के लिए यह अपना ‘नैरेटिव’ सेट करने का सबसे बेहतरीन तरीका होता है।
इस केस की मौजूदा कानूनी स्थिति की बात करें तो, मामले की सुनवाई के दौरान शिकायतकर्ता राजेश कुंते से जिरह (Cross-examination) पूरी हो चुकी है। पहले इस मामले की सुनवाई 20 दिसंबर 2025 को ही होनी थी, लेकिन नए जमानतदार के निधन के चलते इसे 17 जनवरी तक टाला गया। उसके बाद मजिस्ट्रेट ने कागजी कार्रवाई के लिए तारीख बढ़ाते हुए आज यानी 21 फरवरी का दिन तय किया।
अब पूरे देश और कानूनी जानकारों की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि आज भिवंडी कोर्ट में राहुल गांधी की तरफ से नया जमानतदार कौन बनता है? क्या यह कांग्रेस का कोई बड़ा स्थानीय नेता होगा? और सबसे बड़ा सवाल—क्या अदालत जल्द ही इस दशक पुराने मामले में कोई अंतिम फैसला सुनाएगी?
दोस्तों, इस पूरी खबर को और भी विस्तार से समझने के लिए आप नीचे दिया गया हमारा ताज़ा वीडियो देख सकते हैं। इसमें हमने पूरे मामले का बारीकी से विश्लेषण किया है:
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क्या आपको लगता है कि चुनाव प्रचार के दौरान नेताओं द्वारा दिए गए बयानों पर ऐसे लंबे मानहानि के मुकदमे चलना सही है, या राजनीति में बयानों को सिर्फ राजनीति तक ही सीमित रखना चाहिए? (Rahul Gandhi Bhiwandi Court)
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