भारतवर्ष के इतिहास में 19 फरवरी की तारीख सिर्फ एक कैलेंडर की तारीख नहीं, बल्कि स्वाभिमान, शौर्य और सुशासन का विजय पर्व है। आज पूरा देश हिंदवी स्वराज्य के संस्थापक महाराज Shivaji Jayanti मना रहा है। कश्मीर की बर्फीली चोटियों से लेकर हिंद महासागर की लहरों तक, आज एक ही नाम गूंज रहा है—”छत्रपति शिवाजी महाराज की जय!

साल 2026 की यह जयंती इसलिए ऐतिहासिक हो गई है क्योंकि आज इतिहास करवट ले रहा है। एक तरफ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिल्ली से देश को संदेश दिया, तो दूसरी तरफ उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मुगलों के गढ़ माने जाने वाले आगरा किले में भगवा ध्वज फहराकर एक नया अध्याय लिख दिया है।
आइए, विस्तार से जानते हैं कि आज देश में क्या-क्या हुआ, 17 फरवरी को अमित शाह ने क्या माहौल बनाया, और क्यों आज की राजनीति शिवाजी महाराज के इर्द-गिर्द घूम रही है।
PM मोदी का संदेश 'Shivaji Jayanti'
आज सुबह जैसे ही सूर्योदय हुआ, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्र के नाम अपना संदेश जारी किया। पीएम मोदी ने हमेशा शिवाजी महाराज को अपना प्रेरणास्रोत माना है। आज उन्होंने सोशल मीडिया और अपने संबोधन में कहा:
“छत्रपति शिवाजी महाराज का जीवन हमें सिखाता है कि सीमित संसाधनों में भी बड़े से बड़े साम्राज्य (मुगलों) को कैसे झुकाया जा सकता है। उनका ‘हिंदवी स्वराज्य’ का सपना आज ‘विकसित भारत’ की नींव है।”

प्रधानमंत्री ने देश को याद दिलाया कि कैसे उनकी सरकार ने भारतीय नौसेना (Indian Navy) के ध्वज से अंग्रेजों की निशानी ‘सेंट जॉर्ज क्रॉस’ को हटाकर शिवाजी महाराज की राजमुद्रा (Royal Seal) को स्थान दिया। यह कदम बताता है कि आज का भारत अपनी विरासत पर गर्व करता है। पीएम मोदी ने कहा कि शिवाजी महाराज सिर्फ एक योद्धा नहीं, बल्कि एक ‘मैनेजमेंट गुरु’ और ‘पर्यावरण रक्षक’ भी थे।
आगरा किले में इतिहास की वापसी
आज की सबसे बड़ी और धमाकेदार खबर उत्तर प्रदेश के आगरा से आ रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आज आगरा किले के ‘दीवान-ए-आम’ को शिवमय कर दिया है।
इतिहास क्या कहता है?:-
साल 1666 में इसी आगरा किले में मुगल बादशाह औरंगजेब ने शिवाजी महाराज को धोखे से बुलाया था और उन्हें अपमानित कर कैद करने की कोशिश की थी। लेकिन महाराज अपनी बुद्धिमत्ता से फलों की टोकरी में बैठकर वहाँ से निकल भागे थे। वह औरंगजेब के मुंह पर करारा तमाचा था।
आज उसी किले में Shivaji Jayanti का भव्य उत्सव मनाया जा रहा है।
- महाराष्ट्र और यूपी का मिलन: इस कार्यक्रम में शामिल होने के लिए महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस विशेष विमान से आगरा पहुंचे हैं।
- योगी का बयान: सीएम योगी ने मंच से हुंकार भरते हुए कहा, “यह नया भारत है। यहाँ आक्रांताओं का महिमामंडन नहीं, बल्कि राष्ट्रनायकों का सम्मान होगा। आगरा में बन रहा शिवाजी म्यूजियम आने वाली पीढ़ियों को यह याद दिलाएगा।”
अमित शाह ने 17 फरवरी को ही कर दिया था शंखनाद
आज के जश्न की पटकथा दो दिन पहले ही केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने लिख दी थी। 17 फरवरी 2026 को शाह गुजरात के गांधीनगर (सेक्टर-21) में मौजूद थे। वहां उन्होंने शिवाजी महाराज की 21 फीट ऊंची अश्वारूढ़ प्रतिमा का अनावरण किया।
शाह ने अपने भाषण में राजनीति और राष्ट्रभक्ति का ऐसा मिश्रण पेश किया जो आज भी चर्चा में है। उन्होंने कहा-
“जब 16 साल की उम्र में शिवाजी ने तोरण का किला जीता था, तब किसी ने नहीं सोचा था कि वे मुगलों की नींव हिला देंगे। आज अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण भी उसी ‘स्वराज्य’ की भावना का परिणाम है। शिवाजी ने मंदिरों को तोड़ा नहीं, बल्कि उनका पुनर्निर्माण कराया था।”
शाह का यह संदेश साफ था—शिवाजी महाराज की विरासत को आज की सांस्कृतिक राजनीति से जोड़ना।
शिवाजी महाराज की कर्मभूमि और जन्मभूमि महाराष्ट्र में आज का दिन ‘दिवाली’ जैसा है।
- शिवनेरी किला (पुणे): जहाँ 1630 में महाराज का जन्म हुआ था, वहां आज सुबह सीएम शिंदे ने पारंपरिक ‘पालना’ (Cradle Ceremony) रस्म अदा की। लाखों लोग भगवा झंडे लेकर किले की चढ़ाई कर रहे हैं।
- मुंबई और नागपुर: मुंबई के शिवाजी पार्क और नागपुर के संघ मुख्यालय तक, हर जगह शोभा यात्राएं निकाली जा रही हैं। राज्य सरकार ने आज ‘ड्राई डे’ घोषित किया है ताकि पवित्रता बनी रहे।
शिवाजी महाराज: आज के भारत के लिए क्यों जरूरी हैं?
खबरों से हटकर, हमें यह समझना होगा कि 396 साल बाद भी एक राजा इतना प्रासंगिक क्यों है?
A. भारतीय नौसेना के जनक (Father of Indian Navy):
जब भारत के बाकी राजा सिर्फ हाथी-घोड़ों पर लड़ रहे थे, शिवाजी ने समझ लिया था कि “जिसका समंदर पर कब्जा, उसी का राज।” उन्होंने कोंकण तट पर सिंधुदुर्ग और विजयदुर्ग जैसे अभेद्य जल-दुर्ग (Sea Forts) बनाए। आज भी दुनिया उनकी नेवल स्ट्रैटेजी (Naval Strategy) पर रिसर्च करती है।
B. महिलाओं का सम्मान:
कल्याण के सूबेदार की पुत्रवधू को जब युद्ध में बंदी बनाकर लाया गया, तो शिवाजी महाराज ने उसे अपनी माँ समान मानकर ससम्मान वापस भेज दिया। आज जब देश में महिला सुरक्षा पर बहस होती है, तो शिवाजी का चरित्र सबसे बड़ा उदाहरण बनता है।
C. गुरिल्ला युद्ध (Guerrilla Warfare):
कम सेना के बावजूद बड़ी फौज को कैसे हराना है, यह उन्होंने दुनिया को सिखाया। उनकी ‘गनीमी कावा’ नीति (छापामार युद्ध) आज भी मिलिट्री अकादमियों में पढ़ाई जाती है।
निष्कर्ष:-
आज Shivaji Jayanti पर देश ने जो तस्वीर देखी है, वह बदलते भारत की है। 17 फरवरी को अमित शाह का गुजरात में प्रतिमा अनावरण, आज पीएम मोदी का नौसेना को याद करना, और योगी आदित्यनाथ का आगरा किले में भगवा फहराना—यह सब एक ही दिशा में इशारा करता है।
यह इशारा है कि भारत अब अपनी जड़ों की ओर लौट रहा है। मुगलों के इतिहास के पन्नों से धूल हटाकर अब स्वाभिमान का इतिहास लिखा जा रहा है। औरंगजेब की कैद से निकलकर शिवाजी ने जैसे स्वराज्य बनाया था, वैसे ही आज का भारत हर चुनौती से निकलकर ‘विश्वगुरु’ बनने की ओर अग्रसर है।
आपकी राय क्या है?
क्या आगरा के मुगल म्यूजियम का नाम बदलकर आधिकारिक रूप से ‘छत्रपति शिवाजी महाराज म्यूजियम’ कर देना चाहिए?
- (A) हाँ, यह बहुत जरूरी है
- (B) नहीं, इतिहास नहीं बदलना चाहिए
- (C) सरकार का फैसला सही है
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