(यरूशलम / तेहरान): अंतरराष्ट्रीय कूटनीति की दुनिया में पर्दे के पीछे जो चलता है, अक्सर वही युद्ध के मैदान की असली दिशा तय करता है। इन दिनों मिडिल ईस्ट में भी कुछ ऐसा ही हो रहा है। एक तरफ अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत (US Iran Peace Talks) को लेकर मिले-जुले संकेत मिल रहे हैं, तो दूसरी तरफ मध्य पूर्व के दो सबसे बड़े और कट्टर दुश्मन— ईरान और इसराइल— एक-दूसरे पर मिसाइलों और हवाई हमलों की बारिश कर रहे हैं।

सबसे बड़ा सवाल जो अब अंतरराष्ट्रीय मंचों पर गूंज रहा है, वह यह है कि: क्या वाशिंगटन और तेहरान के बीच सुलह की किसी भी संभावना ने इसरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को राजनीतिक और रणनीतिक रूप से मुश्किल में डाल दिया है? आइए, जमीनी हमलों और कूटनीतिक चालों के आधार पर इस पूरे समीकरण का विश्लेषण करते हैं।
अमेरिका और ईरान की बातचीत: नेतन्याहू के लिए 'रेड अलर्ट'
इसराइल की दशकों पुरानी विदेश नीति और रक्षा रणनीति का मुख्य आधार ईरान को अलग-थलग (Isolate) करना रहा है। नेतन्याहू हमेशा से अमेरिका पर यह दबाव बनाते आए हैं कि ईरान के परमाणु कार्यक्रम और उसकी सत्ता को सैन्य ताकत से कुचला जाए।
लेकिन, हालिया कूटनीतिक हलचल यह इशारा कर रही है कि अमेरिका अब इस युद्ध को और लंबा खींचने के पक्ष में नहीं है। अगर अमेरिका किसी भी शर्त पर ईरान के साथ कूटनीतिक टेबल पर बैठता है, तो यह इसराइल के लिए एक बड़ा झटका होगा। विश्लेषकों का मानना है कि अमेरिका के इन नरम संकेतों के कारण ही इसराइल ने अपनी सैन्य कार्रवाई को और आक्रामक कर दिया है, ताकि वह बातचीत की किसी भी गुंजाइश को युद्ध के शोर में दबा सके।
Conflicting reports about potential US Iran Peace Talks have put Israeli Prime Minister Benjamin Netanyahu in a tough diplomatic spot.
इसराइल का बड़ा पलटवार: तेहरान के अंदर दर्जनों हवाई हमले
लह की इन अफवाहों के बीच जमीनी हकीकत खून और बारूद से लिखी जा रही है। इसराइल की सेना (IDF) के आधिकारिक बयानों के मुताबिक, सोमवार रात इसराइल ने ईरान की सीमा के अंदर घुसकर “दर्जनों” सटीक हवाई हमले किए हैं।
इस ऑपरेशन में इसराइल ने ईरान की सबसे ताकतवर सैन्य इकाई इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स कॉर्प (IRGC) के ठिकानों, इंटेलिजेंस मंत्रालय के कमांड सेंटर, हथियारों के गुप्त भंडार और ईरान के एयर डिफेंस सिस्टम को मुख्य रूप से निशाना बनाया है। यह सीधा संदेश है कि इसराइल अपने दम पर ईरान के रणनीतिक ढांचे को तबाह करने की क्षमता और इरादा, दोनों रखता है।
ईरान का भीषण जवाबी हमला: उत्तरी तेल अवीव में तबाही
इसराइल के इस दुस्साहस का ईरान ने भी तुरंत और भीषण जवाब दिया। रात भर ईरान की तरफ से उत्तरी और दक्षिणी इसराइल के कई शहरों को निशाना बनाते हुए बैलिस्टिक मिसाइलें दागी गईं।
उत्तरी तेल अवीव का रिहायशी इलाका इस हमले का मुख्य केंद्र बना। मिसाइलों के असर से हुए ताज़ा धमाकों ने पूरे इलाके को दहला दिया। धमाके वाली जगह के आसपास की बहुमंजिला इमारतों की बालकनी (Balconies) पूरी तरह उखड़ गईं और कंक्रीट के बड़े-बड़े टुकड़े पास की रिहायशी इमारतों के बीच गिरे, जिससे वहां एक बड़ा गड्ढा (Crater) बन गया।
स्थानीय रक्षा रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह ईरानी मिसाइल का एक ‘डायरेक्ट हिट’ (सीधा हमला) था। यह किस्मत ही थी कि कई अपार्टमेंट ब्लॉक्स इस मिसाइल की सीधी ज़द में आने से बाल-बाल बच गए। इस भीषण हमले में छह लोगों के घायल होने की पुष्टि हुई है, हालांकि राहत की बात यह है कि किसी की भी हालत गंभीर नहीं बताई गई है।
Amid whispers of these US Iran Peace Talks, the military confrontation between Tel Aviv and Tehran has escalated significantly.
खौफनाक मंजर: नंगे पैर भागा, पीछे मलबे में आग लगी थी
जब मिसाइलें गिरती हैं, तो आम इंसान की जिंदगी कैसे चंद सेकंड्स में बदल जाती है, इसकी गवाही तेल अवीव हमले की जगह के पास रहने वाले एक प्रत्यक्षदर्शी ने दी।
अंतरराष्ट्रीय मीडिया को दिए एक इंटरव्यू में इस स्थानीय नागरिक ने उस खौफनाक रात का मंजर बयां किया। उन्होंने बताया, “सायरन बजने पर मेरे पास सुरक्षित शेल्टर (Bunker) तक पहुंचने का समय ही नहीं था। मैं जैसे ही अपने घर के मुख्य दरवाज़े तक पहुंचा, एक कान फोड़ देने वाले धमाके ने पूरे दरवाजे को हवा में उड़ा दिया।” उन्होंने आगे बताया कि जान बचाने की अफरा-तफरी में वह नंगे पैर ही अपने अपार्टमेंट से भागे, जबकि उनके आस-पास हर तरफ कांच टूटा हुआ बिखरा था। जब उन्होंने सुरक्षित दूरी से पीछे मुड़कर देखा, तो उनके घर के पास के मलबे में भीषण आग लग चुकी थी।
निष्कर्ष: कूटनीति बनाम मिसाइलें
वर्तमान हालात इस बात का स्पष्ट संकेत हैं कि जब तक अमेरिका का रुख ईरान को लेकर पूरी तरह स्पष्ट नहीं होता, तब तक इसराइल अपने हमलों की तीव्रता कम नहीं करेगा। नेतन्याहू के लिए अब यह सिर्फ राष्ट्रीय सुरक्षा का मुद्दा नहीं है, बल्कि अपनी राजनीतिक साख बचाने की भी लड़ाई है। मिडिल ईस्ट अब एक ऐसे दोराहे पर खड़ा है, जहां एक रास्ता कूटनीतिक मेज की तरफ जाता है और दूसरा तीसरे विश्वयुद्ध की तरफ।
Global defense analysts are observing how the rumors of US Iran Peace Talks are forcing Israel to intensify its independent military strikes.
Q. क्या अमेरिका और ईरान के बीच किसी भी संभावित शांति समझौते से इसराइल (नेतन्याहू) की कूटनीतिक हार होगी?
A) हाँ, इसराइल मिडिल ईस्ट में अकेला पड़ जाएगा।
B) नहीं, इसराइल अपनी सुरक्षा के लिए अमेरिका पर निर्भर नहीं है।
C) अमेरिका कभी भी इसराइल के हितों की अनदेखी नहीं करेगा।
Source : इस खबर का विश्लेषण अंतरराष्ट्रीय न्यूज़ एजेंसियों की ग्राउंड रिपोर्ट्स, इसरायली रक्षा बलों (IDF) के आधिकारिक बयानों और स्थानीय चश्मदीदों से मिली जानकारी पर आधारित है।

